जिस प्रकार एक शिशु पूर्ण विश्वास के साथ अपनी माँ पर आश्रित होता है उसी प्रकार स्वयं को पूर्ण भक्ति के साथ ईश्वर के समक्ष समर्पित कर दें.

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