ईश्वर को प्राप्त करने के दो मार्ग हैं


  • ज्ञान मार्ग 
  • भक्ति मार्ग 
ज्ञान का मार्ग उन व्यक्तियों के लिए है जो अपने पूर्व संचित कर्मों के कारण उस स्तिथि में हैं जहाँ से वह पूर्ण सत्य का अनुभव कर सकते हैं। किन्तु एक नए व्यक्ति  के लिए यह मार्ग कठिन है। क्योंकि अभी वह उस स्तिथि में नहीं पहुंचा है जहाँ से वह सर्वत्र ईश्वर का अनुभव कर सके। अतः उसके लिए आवश्यक है कि वह स्वयं को भक्ति कि तरफ मोड़े।

भक्ति प्रेम कि पराकाष्ठा है। प्रारम्भ में हम ईश्वर को एक पिता, सखा, पुत्र, अथवा एक स्वामी की तरह प्रेम करते हैं। यह प्रेम ईश्वर और भक्त को एक डोर से बंधता है। धीरे धीरे यह रिश्ता इतना गहरा हो जाता है कि व्यक्ति सर्वत्र ही ईश्वर के दर्शन करने लगता है।

ज्ञान और भक्ति मार्ग दोनों ही हमें हमारी मंज़िल तक ले जाते हैं। किन्तु भक्ति का मार्ग प्रेम से भरा होने के कारण रसमय है। इसके कारण मार्ग में आने वाली कठिनाईयों को भक्त हंसते हुए सह लेता है। 

Comments