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कोई एक चींटी के बार बार गिरकर भी दीवार पर चढने से प्रेरणा लेता है और किसी के लिए यह साधारण बात है। हमारा दृष्टिकोण स्तिथियों का निर्धारण करता है।
कभी कभी धारा के विरुद्ध संघर्ष करने की बजाय कुछ वक़्त उसके साथ बहना अधिक उपयुक्त होता है। कुछ समय बाद आप अपनी राह पा लेते हैं।
यदि आप सीखने के इच्छुक हों तो जीवन बहुत कुछ सिखाता है।
दुनिया में बदलाव के लिए स्वयं की सोंच में परिवर्तन आवश्यक है।
अपने भीतर आत्म उन्नति की ज्वाला प्रज्वलित करें और इसे बुझने न दें।
अगले क्षण क्या होगा हमें नहीं मालूम , अतः जीवन जिस रूप में सामने आये उसे जियें।
समस्याओं का एक ही समाधान है, बिना डरे उनका सामना करो।